तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَمَا كُنتُمْ تَسْتَتِرُونَ أَن يَشْهَدَ عَلَيْكُمْ سَمْعُكُمْ وَلَآ أَبْصَـٰرُكُمْ وَلَا جُلُودُكُمْ وَلَـٰكِن ظَنَنتُمْ أَنَّ ٱللَّهَ لَا يَعْلَمُ كَثِيرًا مِّمَّا تَعْمَلُونَ ﴿٢٢﴾
और तुम पाप करते समय अपने पापों को छिपाते भी नहीं थे कि कहीं तुम्हारे कान, तुम्हारी आँखें तथा तुम्हारी खालें तुम्हारे विरुद्ध गवाही न दे दें, क्योंकि तुम हिसाब, यातना तथा मौत के पश्चात बदले का यक़ीन ही नहीं रखते थे। तुम समझते रहे कि अल्लाह तुम्हारे अधिकतर कर्मों को जानता ही नहीं है, बल्कि वह उनसे अनभिज्ञ रहता है। यही कारण है कि तुम धोखे में पड़ गए।