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النساء

आयत 125

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَمَنْ أَحْسَنُ دِينًا مِّمَّنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُۥ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَٱتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَٰهِيمَ حَنِيفًا ۗ وَٱتَّخَذَ ٱللَّهُ إِبْرَٰهِيمَ خَلِيلًا ﴿١٢٥﴾

उस व्यक्ति से बेहतर धर्म किसी का नहीं है, जो बाहरी और आंतरिक रूप से अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाए, अपनी नीयत को उसके लिए विशुद्ध कर ले, उसकी शरीयत का पालनकर अपने कार्य को अच्छा कर ले और शिर्क एवं कुफ़्र से कटकर तौहीद और ईमान की ओर एकाग्र होकर, इबराहीम अलैहिसस्सलाम के धर्म का अनुसरण करे, जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के धर्म का मूल है। अल्लाह ने अपने नबी इबराहीम अलैहिस्सलाम को सारे लोगों के बीच पूर्ण प्रेम के लिए चुन लिया है।