तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَلَيْسَ ٱللَّهُ بِكَافٍ عَبْدَهُۥ ۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦ ۚ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍ ﴿٣٦﴾
क्या अल्लाह अपने बंदे मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम के धार्मिक एवं सांसारिक हितों की रक्षा और उन्हें उनके शत्रु से बचाने के लिए काफ़ी नहीं है?! क्यों नही, निश्चय वह आपके लिए काफी है। तथा (ऐ रसूल!) वे लोग अपनी अज्ञानता और मूर्खता के कारण, आपको उन मूर्तियों से डराते हैं, जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पूजते हैं कि वे आपको कोई हानि पहुँचा देंगी। तथा जिसे अल्लाह असहाय छोड़ दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक न दे, तो उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं है, जो उसका मार्गदर्शन करे और उसे उसका सामर्थ्य प्रदान करे।