तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ٱللَّهُ نَزَّلَ أَحْسَنَ ٱلْحَدِيثِ كِتَـٰبًا مُّتَشَـٰبِهًا مَّثَانِىَ تَقْشَعِرُّ مِنْهُ جُلُودُ ٱلَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمْ وَقُلُوبُهُمْ إِلَىٰ ذِكْرِ ٱللَّهِ ۚ ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهْدِى بِهِۦ مَن يَشَآءُ ۚ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍ ﴿٢٣﴾
अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क़ुरआन उतारा है, जो सबसे उत्तम हदीस (बात) है। अल्लाह ने इसे परस्पर मिलता-जुलता उतारा है, इसका एक भाग दूसरे भाग से सच्चाई, अच्छाई, एकरूपता और विभेद-रहित होने में मिलता-जुलता है, जिसमें विभिन्न कहानियाँ और अहकाम (नियम), वादे और धमकियाँ, सत्यवादियों के गुण और असत्यवादियों की विशेषताएँ, आदि वर्णित हैं। इससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जो अपने पालनहार से डरते हैं, जब वे उसमें वर्णित सज़ा के वादों और दंड की धमकियों को सुनते हैं। फिर जब वे उसमें मौजूद आशा और शुभ समाचार को सुनते हैं, तो उनके चमड़े और दिल नरम होकर अल्लाह के ज़िक्र की ओर प्रेरित हो जाते हैं। यह उपर्युक्त क़ुरआन और उसका प्रभाव, अल्लाह का मार्गदर्शन है, वह जिसे चाहता है उसका मार्गदर्शन प्रदान करता है। और जिसे अल्लाह विफल कर दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ न दे, तो उसके लिए मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है।