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الزمر

आयत 10

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ يَـٰعِبَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّقُوا۟ رَبَّكُمْ ۚ لِلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ فِى هَـٰذِهِ ٱلدُّنْيَا حَسَنَةٌ ۗ وَأَرْضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٌ ۗ إِنَّمَا يُوَفَّى ٱلصَّـٰبِرُونَ أَجْرَهُم بِغَيْرِ حِسَابٍ ﴿١٠﴾

(ऐ रसूल!) आप मेरे उन बंदों से, जो मुझपर और मेरे रसूलों पर ईमान लाए हैं, कह दें : अपने पालनहार से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर। तुममें से जिन लोगों ने दुनिया में अच्छे कार्य किए, उनके लिए दुनिया में विजय (मदद), स्वास्थ्य और धन के रूप में, तथा आख़िरत में जन्नत के रूप में, भलाई है। और अल्लाह की धरती विशाल है। इसलिए उसमें हिजरत करो यहाँ तक कि तुम्हें ऐसी जगह मिल जाए, जहाँ तुम बिना रोक-टोक के अल्लाह की इबादत कर सको। सब्र करने वालों को क़ियामत के दिन उनका बदला, उसकी बहुतायत और विविधता के कारण, बिना गिनती किए या बिना मात्रा के दिया जाएगा।