तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ ﴿٧٢﴾
जब मैं उसकी रचना का काम पूरा कर लूँ, उसकी शक्ल-सूरत ठीक कर दूँ और उसमें अपनी आत्मा फूँक दूँ, तो तुम उसे सजदा करो।
तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ ﴿٧٢﴾