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आयत 63

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَتَّخَذْنَـٰهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ ٱلْأَبْصَـٰرُ ﴿٦٣﴾

क्या हमारा उनका मज़ाक़ उड़ाना और ठट्ठा करना गलत था, चुनाँचे वे यातना के पात्र नहीं थे, या हमारा उनका परिहास करना सही था और वे जहन्नम में दाखिल हुए हैं, किंतु हमारी नज़र उन पर नहीं पड़ी?!