×

ص

आयत 59

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

هَـٰذَا فَوْجٌ مُّقْتَحِمٌ مَّعَكُمْ ۖ لَا مَرْحَبًۢا بِهِمْ ۚ إِنَّهُمْ صَالُوا۟ ٱلنَّارِ ﴿٥٩﴾

जब जहन्नमी लोग जहन्नम में प्रवेश कर जाएँगे, तो उनके बीच वैसी ही कहा-सुनी होगी, जो विरोधियों के बीच आपस में हुआ करती है और वे एक-दूसरे से अपनी बराअत का इज़हार करेंगे। चुनाँचे उनमें से कुछ लोग कहेंगे : यह जहन्नम वालों का एक समूह है जो तुम्हारे साथ जहन्नम में घुसता चला आ रहा है। तो वे जवाब देंगे : उनका स्वागत नहीं है। वे उसी तरह आग की यातना झेलने वाले हैं, जैसे हम झेल रहे हैं।