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आयत 36

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَسَخَّرْنَا لَهُ ٱلرِّيحَ تَجْرِى بِأَمْرِهِۦ رُخَآءً حَيْثُ أَصَابَ ﴿٣٦﴾

तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली और हवा को उनके अधीन कर दिया, जो उनके आदेश से नरम होकर चलती थी। हवा के तेज़ और शक्तिशाली होने के बावजूद उसमें कोई झटका नहीं थी। वह उन्हें, जहाँ चाहते, ले जाती थी।