तफ़सीर अल-मुख़्तसर
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ قُل لِّأَزْوَٰجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا ﴿٢٨﴾
ऐ नबी! अपनी पत्नियों से कह दें, जबकि उन्होंने आपसे नफ़क़ा (भरण-पोषण) में विस्तार करने की माँग की है और आपके पास उन पर विस्तार करने के लिए कुछ भी नहीं है : अगर तुम दुनिया का जीवन और उसकी शोभा चाहती हो, तो मेरे पास आओ, मैं तुम्हें कुछ सामान दे दूँ, जो तलाक़शुदा महिलाओं को दिया जाता है और तुम्हें बिना कोई नुक़सान पहुँचाए या कष्ट दिए तलाक़ दे दूँ।