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الروم

आयत 8

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا۟ فِىٓ أَنفُسِهِم ۗ مَّا خَلَقَ ٱللَّهُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَأَجَلٍ مُّسَمًّى ۗ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ ٱلنَّاسِ بِلِقَآئِ رَبِّهِمْ لَكَـٰفِرُونَ ﴿٨﴾

क्या इन झुठलाने वाले मुश्रिकों ने अपने बारे में सोच-विचार नहीं किया कि अल्लाह ने उन्हें कैसे पैदा किया और ठीक-ठाक बनाया? अल्लाह ने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है सत्य के साथ ही पैदा किया है। उसने उन्हें व्यर्थ पैदा नहीं किया। तथा उनके लिए दुनिया में बने रहने के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की। निश्चित रूप से बहुत-से लोग क़ियामत के दिन अपने रब से मिलने का इनकार करते हैं। इसलिए वे अपने पालनहार के निकट पसंदीदा नेक कार्य करके पुनर्जीवन के लिए तैयारी नहीं करते हैं।