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الروم

आयत 37

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ﴿٣٧﴾

क्या उन्होंने यह नहीं देखा कि अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, उसकी रोज़ी का विस्तार कर देता है, उसके लिए एक परीक्षण के रूप में कि वह आभार प्रकट करता है या कृतघ्नता दिखाता है? तथा उनमें से जिसके लिए चाहता है, उसकी रोज़ी तंग कर देता है, उसके लिए एक परीक्षण के तौर पर कि वह सब्र करता है या क्रुद्ध होता है?! निश्चित रूप से कुछ के लिए आजीविका का विस्तार करने और कुछ के लिए रोज़ी को तंग करने में, ईमान वालों के लिए अल्लाह की दया और करुणा के बहुत-से संकेत हैं।