×

الروم

आयत 33

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَإِذَا مَسَّ ٱلنَّاسَ ضُرٌّ دَعَوْا۟ رَبَّهُم مُّنِيبِينَ إِلَيْهِ ثُمَّ إِذَآ أَذَاقَهُم مِّنْهُ رَحْمَةً إِذَا فَرِيقٌ مِّنْهُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ ﴿٣٣﴾

जब मुश्रिकों को बीमारी या गरीबी या सूखे की गंभीरता का सामना करना पड़ता है, तो वे केवल अपने महिमावान पालनहार ही को पुकारते हैं, विलाप और इस विनती के साथ उसकी ओर लौटते हुए कि वह उनकी विपत्ति को उनसे टाल दे। फिर जब वह उनकी विपत्ति को टालकर उनपर दया करता है, तो सहसा उनमें से एक समूह दुआ में अल्लाह के साथ उसके अलावा को साझी ठहराने की ओर लौट आता है।