तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَمْ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَآئِهِمْ شُفَعَـٰٓؤُا۟ وَكَانُوا۟ بِشُرَكَآئِهِمْ كَـٰفِرِينَ ﴿١٣﴾
और उनके लिए उनके साझियों में से (जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे) उन्हें यातना से बचाने के लिए सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे। और वे अपने साझियों का इनकार कर बैठेंगे। क्योंकि उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर उन्हें छोड़ दिया। इसलिए कि वे सभी तबाही में बराबर हैं।