तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٥٧﴾
और जो लोग आपपर और उस सत्य पर ईमान लाए जो आप उनके पास लेकर आए, और नमाज़, ज़कात, रोज़ा और रिश्तेदारों के साथ सद्व्यवहार इत्यादि जैसे अच्छे कर्म किए; अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा, उसमें कुछ कमी नहीं करेगा। यह बात मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व से पहले मसीह के अनुयायियों के बारे में है, जिनकी स्वयं मसीह ने शुभ सूचना दी थी। और अल्लाह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता। और सबसे बड़ा अत्याचार अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाना तथा उसके रसूलों को झुठलाना है।