तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّى وَضَعْتُهَآ أُنثَىٰ وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ ٱلذَّكَرُ كَٱلْأُنثَىٰ ۖ وَإِنِّى سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّىٓ أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ ٱلشَّيْطَـٰنِ ٱلرَّجِيمِ ﴿٣٦﴾
फिर जब उनका गर्भ पूरा हो गया, तो उन्होंने उसे जन दिया जो उनके पेट में था और (वह उम्मीद कर रही थीं कि गर्भ पुरुष होगा, इसलिए) क्षमा चाहते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! यह तो मैंने बच्ची जनी है! और अल्लाह ज़्यादा जानने वाला है जो उन्होंने जना, और वह लड़का जिसकी वह आशा कर रही थीं, शक्ति और संरचना में उस लड़की के समान नहीं, जो उन्हें दी गई थी। तथा मैंने उसका नाम मरयम रखा है और मैंने उसे और उसकी संतान को तेरी दया से निष्कासित शैतान से तेरे संरक्षण में दे दिया है।