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آل عمران

आयत 30

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

يَوْمَ تَجِدُ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ مِنْ خَيْرٍ مُّحْضَرًا وَمَا عَمِلَتْ مِن سُوٓءٍ تَوَدُّ لَوْ أَنَّ بَيْنَهَا وَبَيْنَهُۥٓ أَمَدًۢا بَعِيدًا ۗ وَيُحَذِّرُكُمُ ٱللَّهُ نَفْسَهُۥ ۗ وَٱللَّهُ رَءُوفٌۢ بِٱلْعِبَادِ ﴿٣٠﴾

क़ियामत के दिन प्रत्येक प्राणी अपने अच्छे कार्य को बिना किसी कमी के सामने हाज़िर पाएगा तथा जिसने बुरा कार्य किया होगा, वह कामना करेगा कि उसके तथा उसके बुरे कर्मों के बीच एक लंबा समय होता। लेकिन उसकी कामना कैसे पूरी हो सकती है! और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है। अतः पाप करके अपने आपको उसके क्रोध से पीड़ित न करो। अल्लाह अपने बंदों के प्रति अत्यंत करुणामय है। इसीलिए उन्हें चेतावनी देता है और उन्हें डराता है।