तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَكَيْفَ إِذَا جَمَعْنَـٰهُمْ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ﴿٢٥﴾
(उस समय) उनका हाल और उनका पछताना कैसा होगा?! निश्चय वह बहुत बुरा होगा जब हम उन्हें हिसाब के लिए एक ऐसे दिन में एकत्र करेंगे, जिसमें कोई संदेह नहीं और वह क़ियामत का दिन है। और हर प्राणी को उसके किए हुए कार्यों का उसके योग्य बदला दिया जाएगा। उसकी नेकियों को घटाकर या उसकी बुराइयों को बढ़ाकर उसपर अत्याचार नहीं किया जाएगा।