तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَا يَحْزُنكَ ٱلَّذِينَ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْكُفْرِ ۚ إِنَّهُمْ لَن يَضُرُّوا۟ ٱللَّهَ شَيْـًٔا ۗ يُرِيدُ ٱللَّهُ أَلَّا يَجْعَلَ لَهُمْ حَظًّا فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ ﴿١٧٦﴾
(ऐ रसूल) मुनाफिक़ो में से जो लोग अपनी एड़ियों के बल पलटते हुए कुफ़्र (अविश्वास) में जल्दी कर रहे हैं, आप उनसे दुःखी न हों। क्योंकि वे अल्लाह को कोई हानि नहीं पहुँचा सकते। बल्कि वे अल्लाह पर ईमान और उसके आज्ञापालन से दूर होकर स्वयं को नुकसान पहुँचा रहे हैं। अल्लाह उन्हें असहाय छोड़कर और उन्हें तौफ़ीक़ न देकर यह चाहता है कि उनके लिए आख़िरत की नेमतों में से कोई हिस्सा न रह जाए। और उनके लिए वहाँ जहन्नम में बहुत बड़ी यातना है।