तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَتِ ٱمْرَأَتُ فِرْعَوْنَ قُرَّتُ عَيْنٍ لِّى وَلَكَ ۖ لَا تَقْتُلُوهُ عَسَىٰٓ أَن يَنفَعَنَآ أَوْ نَتَّخِذَهُۥ وَلَدًا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴿٩﴾
जब फ़िरऔन ने उसे मार डालना चाहा, तो उसकी पत्नी ने उससे कहा : यह शिशु मेरे और तुम्हारे लिए आनंद का कारण है। इसे मत मारो, हो सकता है कि यह हमें सेवा से लाभ पहुँचाए, या हम इसे दत्तक पुत्र बना लें। और वे नहीं जानते थे कि उसके हाथ से उनके राज्य का परिणाम क्या होगा।