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القصص

आयत 16

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قَالَ رَبِّ إِنِّى ظَلَمْتُ نَفْسِى فَٱغْفِرْ لِى فَغَفَرَ لَهُۥٓ ۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٦﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने रब से प्रार्थना करते हुए और जो कुछ उनसे हुआ उसे स्वीकारते हुए कहा : ऐ मेरे रब! मैंने इस क़िब्ती को मारकर अपने आप पर अत्याचार किया है। अतः तू मेरे पाप को क्षमा कर दे। तो अल्लाह ने हमें मूसा के लिए अपनी क्षमा स्पष्ट कर दी। निःसंदेह वह अपने क्षमा याचना करने वाले बंदों के लिए क्षमाशील तथा उनपर अत्यंत दयावान् है।