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الشعراء

आयत 215

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿٢١٥﴾

तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करें, उनपर दया एवं नरमी करते हुए उनके साथ विनम्रता का व्यवहार करें।