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الفرقان

आयत 77

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

قُلْ مَا يَعْبَؤُا۟ بِكُمْ رَبِّى لَوْلَا دُعَآؤُكُمْ ۖ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًۢا ﴿٧٧﴾

(ऐ रसूल!) आप कुफ़्र पर अड़े रहने वाले काफ़िरों से कह दें : मेरा पालनहार तुम्हारी परवाह नहीं करता कि उसे तुम्हारे आज्ञापालन से कोई लाभ मिलने वाला है। यदि उसके कुछ बंदे ऐसे न होते, जो उसे इबादत के तौर पर और कुछ माँगने के लिए पुकारते रहते हैं, तो वह तुम्हारी कभी परवाह न करता। क्योंकि रसूल तुम्हारे रब की ओर से तुम्हारे पास जो कुछ लाए हैं, उसमें तुमने रसूल को झुठलाया है। अतः उस झुठलाने का दंड तो तुम्हें मिलकर ही रहेगा।