तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لِّنُحْـِۧىَ بِهِۦ بَلْدَةً مَّيْتًا وَنُسْقِيَهُۥ مِمَّا خَلَقْنَآ أَنْعَـٰمًا وَأَنَاسِىَّ كَثِيرًا ﴿٤٩﴾
ताकि हम उस उतरने वाले पानी से पौधे रहित बंजर भूमि को, विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के साथ उगाकर और उसमें हरियाली फैलाकर, पुनर्जीवित करें और ताकि उस पानी से हम अपने पैदा किए हुए बहुत-से पशुओं और इनसानों को सेराब करें।