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الفرقان

आयत 44

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

أَمْ تَحْسَبُ أَنَّ أَكْثَرَهُمْ يَسْمَعُونَ أَوْ يَعْقِلُونَ ۚ إِنْ هُمْ إِلَّا كَٱلْأَنْعَـٰمِ ۖ بَلْ هُمْ أَضَلُّ سَبِيلًا ﴿٤٤﴾

बल्कि, क्या (ऐ रसूल!) आप यह समझते हैं कि जिन लोगों को आप अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसकी आज्ञाकारिता की ओर बुला रहे हैं, उनमें से अधिकांश लोग आपकी बात को स्वीकार करने के लिए सुनते या तर्कों और प्रमाणों को समझते हैं?! वे सुनने एवं समझने के मामले में पशुओं के समान हैं, बल्कि वे पशुओं से भी अधिक पथभ्रष्ट हैं।