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الفرقان

आयत 3

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً لَّا يَخْلُقُونَ شَيْـًٔا وَهُمْ يُخْلَقُونَ وَلَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا وَلَا يَمْلِكُونَ مَوْتًا وَلَا حَيَوٰةً وَلَا نُشُورًا ﴿٣﴾

मुश्रिकों ने अल्लाह को छोड़कर ऐसे पूज्य बना लिए, जो कोई भी छोटी या बड़ी चीज़ नहीं पैदा कर सकते। बल्कि वे स्वयं पैदा किए जाते हैं। अल्लाह ने उन्हें अनस्तित्व से अस्तित्व प्रदान किया है। वे अपने किसी हानि को दूर करने, या अपने लिए कोई लाभ प्राप्त करने की भी शक्ति नहीं रखते। वे न किसी जीवित को मार सकते और न किसी मृत को जीवित कर सकते। तथा वे मुर्दों को उनकी क़ब्रों से उठा भी नहीं सकते।