तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَآءَنَا لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْنَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ أَوْ نَرَىٰ رَبَّنَا ۗ لَقَدِ ٱسْتَكْبَرُوا۟ فِىٓ أَنفُسِهِمْ وَعَتَوْ عُتُوًّا كَبِيرًا ﴿٢١﴾
और जो काफ़िर हमसे मिलने की आशा नहीं रखते और हमारी सज़ा से नहीं डरते, उन्होंने कहा : अल्लाह ने हमारे पास फ़रिश्ते क्यों नहीं भेजे, जो हमें मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सत्यता के विषय में बताते, अथवा हम अपने पालनहार को अपनी आँखों से देख लेते और वह हमें इस विषय में सब कुछ बता देता? निश्चित रूप से इन लोगों के दिलों में अहंकार इतना बढ़ गया है कि उसने इन्हें ईमान से रोक दिया है और वे ऐसा कहकर कुफ़्र और सरकशी में सीमा को पार कर चुके हैं।