तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قَالُوا۟ سُبْحَـٰنَكَ مَا كَانَ يَنۢبَغِى لَنَآ أَن نَّتَّخِذَ مِن دُونِكَ مِنْ أَوْلِيَآءَ وَلَـٰكِن مَّتَّعْتَهُمْ وَءَابَآءَهُمْ حَتَّىٰ نَسُوا۟ ٱلذِّكْرَ وَكَانُوا۟ قَوْمًۢا بُورًا ﴿١٨﴾
वे पूज्य कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! तू इस बात से पवित्र है कि तेरा कोई साझी हो। हमारे लिए यह उचित नहीं था कि तुझे छोड़कर अन्य लोगों को संरक्षक बनाकर उनका संरक्षण ग्रहण करते, तो फिर हम तेरे बंदों से किस तरह आह्वान कर सकते थे कि वे तुझे छोड़कर हमारी पूजा करें?! लेकिन असल बात यह है कि तूने इन मुश्रिकों को दुनिया की सुख-सुविधाएँ प्रदान कीं और इनसे पहले इनके बाप-दादों को भी ढील देने के लिए धन-संपन्नता प्रदान की थी, यहाँ तक कि वे तेरी याद को भूला गए। इसलिए उन्होंने तेरे साथ दूसरों की पूजा की, तथा वे अपने दुर्भाग्य के कारण विनष्ट होने वाले लोग थे।