तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَّا تَدْعُوا۟ ٱلْيَوْمَ ثُبُورًا وَٰحِدًا وَٱدْعُوا۟ ثُبُورًا كَثِيرًا ﴿١٤﴾
(ऐ काफ़िरो!) आज एक विनाश को मत पुकारो, बल्कि बहुत अधिक विनाशों को पुकारो। लेकिन तुम्हारी फ़रियाद सुनी नहीं जाएगी, बल्कि तुम दर्दनाक यातना में हमेशा पड़े रहोगे।