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النور

आयत 32

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَأَنكِحُوا۟ ٱلْأَيَـٰمَىٰ مِنكُمْ وَٱلصَّـٰلِحِينَ مِنْ عِبَادِكُمْ وَإِمَآئِكُمْ ۚ إِن يَكُونُوا۟ فُقَرَآءَ يُغْنِهِمُ ٱللَّهُ مِن فَضْلِهِۦ ۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ ﴿٣٢﴾

(ऐ ईमान वालो!) उन पुरुषों का विवाह कर दो, जिनकी पत्नियाँ नहीं हैं तथा उन आज़ाद महिलाओं का भी, जिनके पति नहीं हैं और अपने ईमान वाले दासों एवं दासियों का भी विवाह कर दो। यदि वे निर्धन हैं, तो अल्लाह अपने विशाल अनुग्रह से उन्हें धनी बना देगा। अल्लाह बड़ा जीविका दाता है। किसी को धनी बनाने से उसकी जीविका में कमी नहीं होती। वह अपने बंदों की स्थितियों से अवगत है।