तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قَالُوٓا۟ أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ﴿٨٢﴾
उन्होंने पुनर्जीवन का इनकार करते हुए और उसे असंभव जताते हुए कहा : क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या सचमुच हमें हिसाब के लिए जीवित करके उठाया जाएगा?!