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المؤمنون

आयत 37

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

إِنْ هِىَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ ﴿٣٧﴾

जीवन तो केवल इस संसार का जीवन है। आख़िरत का जीवन कुछ भी नहीं है। हम में से जीवित लोग मरते हैं और वे फिर से जीवित नहीं होते। तथा अन्य लोग जन्म लेते हैं और वे जीवित रहते हैं। और हम अपनी मौत के बाद क़ियामत के दिन हिसाब के लिए निकाले जाने वाले नहीं हैं।