तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِلِقَآءِ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَأَتْرَفْنَـٰهُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا مَا هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ يَأْكُلُ مِمَّا تَأْكُلُونَ مِنْهُ وَيَشْرَبُ مِمَّا تَشْرَبُونَ ﴿٣٣﴾
उसकी जाति के अशराफिया एवं प्रमुख लोग, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया, आख़िरत तथा उसके इनाम और सज़ा को झुठलाया, और सांसारिक जीवन में हमारी दी हुई विस्तृत नेमतों ने उन्हें सरकश बना दिया था, उन्होंने अपने अनुयायियों और आम लोगों से कहा : यह तो तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है। जो वही कुछ खाता और पीता है, जो कुछ तुम खाते और पीते हो। इसलिए इसे तुम्हारे ऊपर कोई विशिष्टता प्राप्त नहीं है कि वह तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजा जाए।