तफ़सीर अल-मुख़्तसर
فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ وَوَهَبْنَا لَهُۥ يَحْيَىٰ وَأَصْلَحْنَا لَهُۥ زَوْجَهُۥٓ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْخَيْرَٰتِ وَيَدْعُونَنَا رَغَبًا وَرَهَبًا ۖ وَكَانُوا۟ لَنَا خَـٰشِعِينَ ﴿٩٠﴾
तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें यह़या के रूप में एक बेटा प्रदान किया और उनकी पत्नी को ठीक कर दिया। चुनाँचे वह बच्चा जनने वाली हो गई, जबकि वह पहले बच्चा जनने के योग्य नहीं थी। निश्चय ज़करिया, उनकी पत्नी और उनके बेटे, नेकियाँ करने में बहुत जल्दी करते थे तथा वे हमें हमारे सवाब के लोभ में और हमारी सज़ा से डरते हुए पुकारते थे और हमारे सामने गिड़गिड़ाने वाले थे।