तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَوْ يَعْلَمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ ٱلنَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ﴿٣٩﴾
अगर मरणोपरांत दोबारा जीवित होने का इनकार करने वाले ये काफ़िर उस समय को जान लेते, जब वे अपने चेहरों और अपनी पीठों से आग को दूर नहीं कर सकेंगे, और यह कि उनका कोई मददगार नहीं होगा, जो उनसे अज़ाब को दूर कर सके। अगर इन्हें इस बात का यक़ीन होता, तो वे अज़ाब की जल्दी न मचाते।