तफ़सीर अल-मुख़्तसर
لَاهِيَةً قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا۟ ٱلنَّجْوَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ هَلْ هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ ٱلسِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ﴿٣﴾
उन्होंने इसे इस हाल में सुना कि उनके दिल इससे पूरी तरह ग़ाफ़िल थे। और कुफ़्र के द्वारा अत्याचार करने वालों ने उस बात को गुप्त रखा, जो वे आपस में यह कहते हुए कानाफूसी कर रहे थे : यह व्यक्ति जो रसूल होने का दावा करता है, तुम्हारे ही जैसे एक इनसान के सिवा क्या है, जिसे तुमसे हटकर कोई विशिष्टता प्राप्त नहीं है?! तथा वह जो कुछ लेकर आया है, केवल जादू है। तो क्या तुम यह जानते हुए भी कि वह तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है और वह जो कुछ लेकर आया है, मात्र जादू है, तुम उसके पीछे चलने के लिए तैयार हो?!