तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قَالُوا۟ مَآ أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَـٰكِنَّا حُمِّلْنَآ أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ ٱلْقَوْمِ فَقَذَفْنَـٰهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى ٱلسَّامِرِىُّ ﴿٨٧﴾
मूसा की जाति के लोगों ने कहा : हमने (ऐ मूसा!) आपके वचन को अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में भंग किया है। दरअसल हमपर फ़िरऔन की जाति के गहनों के भारी बोझ लाद दिए गए थे, जिनसे छुटकारा पाने के लिए हमने उन्हें एक गड्ढे में फेंक दिया। जिस प्रकार हमने उन्हें गड्ढे में फेंक दिया, उसी प्रकार सामिरी ने भी अपने पास मौजूद जिबरील अलैहिस्सलाम के घोड़े के खुर की मिट्टी को फेंक दिया।