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البقرة

आयत 87

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَـٰبَ وَقَفَّيْنَا مِنۢ بَعْدِهِۦ بِٱلرُّسُلِ ۖ وَءَاتَيْنَا عِيسَى ٱبْنَ مَرْيَمَ ٱلْبَيِّنَـٰتِ وَأَيَّدْنَـٰهُ بِرُوحِ ٱلْقُدُسِ ۗ أَفَكُلَّمَا جَآءَكُمْ رَسُولٌۢ بِمَا لَا تَهْوَىٰٓ أَنفُسُكُمُ ٱسْتَكْبَرْتُمْ فَفَرِيقًا كَذَّبْتُمْ وَفَرِيقًا تَقْتُلُونَ ﴿٨٧﴾

हमने मूसा को तौरात प्रदान किया तथा उनके बाद उनके पीछे ही बहुत से रसूल भेजे, और ईसा बिन मरयम को उनकी सच्चाई को दर्शाने वाली स्पष्ट निशानियाँ प्रदान कीं; जैसे मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करना, अंधे पैदा हुए लोगों को ठीक करना और कोढ़ी को चंगा करना। तथा हमने उन्हें जिबरील नामी फ़रिश्ते द्वारा शक्ति प्रदान की। फिर क्या जब भी - ऐ बनी इसराईल! - अल्लाह की ओर से कोई रसूल तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आया, जो तुम्हारी इच्छाओं के अनुकूल नहीं थी, तो तुमने सत्य को स्वीकार करने से अभिमान किया और अल्लाह के रसूलों पर बड़ा बनने लगे; चुनाँचे उनमें से एक समूह को तुम झुठलाते रहे और एक समूह की हत्या करते रहे?।