तफ़सीर अल-मुख़्तसर
كَيْفَ تَكْفُرُونَ بِٱللَّهِ وَكُنتُمْ أَمْوَٰتًا فَأَحْيَـٰكُمْ ۖ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ثُمَّ إِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ﴿٢٨﴾
ऐ काफ़िरो! तुम्हारा मामला बड़ा अद्भुत है! तुम अल्लाह का इनकार कैसे करते हो, जबकि तुम उसके सामर्थ्य की निशानियाँ खुद अपने अंदर देखते हो; क्योंकि तुम कुछ भी नहीं थे, तो उसने तुम्हें बनाया और जीवन दिया, फिर वह तुम्हें दूसरी मौत देगा, फिर तुम्हें दूसरा जीवन प्रदान करेगा, फिर वह तुम्हें अपनी ओर लौटाएगा, ताकि जो कुछ तुमने किया है उसका तुमसे हिसाब ले।