तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ خَرَجُوا۟ مِن دِيَـٰرِهِمْ وَهُمْ أُلُوفٌ حَذَرَ ٱلْمَوْتِ فَقَالَ لَهُمُ ٱللَّهُ مُوتُوا۟ ثُمَّ أَحْيَـٰهُمْ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَشْكُرُونَ ﴿٢٤٣﴾
(ऐ नबी!) क्या आपके संज्ञान में उन लोगों की ख़बर नहीं आई, जो महामारी या किसी और कारण मौत के डर से, अपने घरों को छोड़कर निकल पड़े, जबकि वे बहुत बड़ी संख्या में थे। वे बनी इसराईल का एक समूह थे। अल्लाह ने उनसे कहा : मर जाओ; सो वे मर गए। फिर अल्लाह ने उन्हें जीवित कर दिया। ताकि उनके लिए यह तथ्य स्पष्ट कर दे कि सारा मामला उसी महिमावान् के हाथ में है और यह कि वे अपने लिए किसी लाभ या हानि के मालिक नहीं हैं। निःसंदेह अल्लाह लोगों के प्रति उदार और अनुग्रहकारी है, परंतु अधिकांश लोग अल्लाह का उसकी नेमतों पर शुक्रिया अदा नहीं करते।