तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱلَّذِينَ يُتَوَفَّوْنَ مِنكُمْ وَيَذَرُونَ أَزْوَٰجًا يَتَرَبَّصْنَ بِأَنفُسِهِنَّ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ وَعَشْرًا ۖ فَإِذَا بَلَغْنَ أَجَلَهُنَّ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْكُمْ فِيمَا فَعَلْنَ فِىٓ أَنفُسِهِنَّ بِٱلْمَعْرُوفِ ۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ﴿٢٣٤﴾
जो लोग मर जाते हैं और अपने पीछे अगर्भवती पत्नियाँ छोड़ जाते हैं; वे पत्नियाँ अनिवार्य रूप से चार महीने और दस दिन की अवधि के लिए अपने आपको प्रतीक्षा में रखेंगी, जिसके दौरान वे पति के घर से निकलने, श्रृंगार करने और विवाह से बचेंगी। जब यह अवधि समाप्त हो जाए; तो - ऐ अभिभावको! - तुमपर कोई पाप नहीं कि वे शरई और प्रथागत तरीक़े के अनुसार, वह कार्य करें जो उस अवधि के दौरान उनके लिए वर्जित था। तथा अल्लाह उससे, जो कुछ तुम करते हो, भली-भाँति अवगत है। उससे तुम्हारे प्रोक्ष और प्रत्यक्ष में से कोई चीज़ छिपी नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।