तफ़सीर अल-मुख़्तसर
كُتِبَ عَلَيْكُمُ ٱلْقِتَالُ وَهُوَ كُرْهٌ لَّكُمْ ۖ وَعَسَىٰٓ أَن تَكْرَهُوا۟ شَيْـًٔا وَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۖ وَعَسَىٰٓ أَن تُحِبُّوا۟ شَيْـًٔا وَهُوَ شَرٌّ لَّكُمْ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ﴿٢١٦﴾
(ऐ मोमिनो!) तुमपर अल्लाह के रास्ते में लड़ाई करना अनिवार्य कर दिया गया है, हालाँकि स्वाभाविक रूप से दिल उसे नापसंद करता है; क्योंकि इसमें जान एवं माल दोनों ख़र्च करना पड़ता है। और शायद तुम किसी चीज़ को नापसंद करो और वह वास्तव में तुम्हारे हक़ में बेहतर और लाभदायक हो; जैसे कि अल्लाह के मार्ग में लड़ाई करना। क्योंकि इसके प्रतिफल की महानता के साथ, इसमें शत्रुओं पर विजय और अल्लाह के धर्म की सर्वोपरि है। तथा शायद तुम किसी चीज़ को पसंद करो और वह चीज़ तुम्हारे लिए बुरी और विपत्ति (संकट) का करण हो; जैसे कि जिहाद से पीछे रहना। क्योंकि इसमें निःसहायता और दुश्मनों का प्रभुत्व है। और अल्लाह अच्छी और बुरी बातों को भली-भाँति जानता है, और तुम उसे नहीं जानते, सो तुम उसकी आज्ञा का पालन करो; क्योंकि इसी में तुम्हारे लिए भलाई है।