तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَإِذَا قِيلَ لَهُ ٱتَّقِ ٱللَّهَ أَخَذَتْهُ ٱلْعِزَّةُ بِٱلْإِثْمِ ۚ فَحَسْبُهُۥ جَهَنَّمُ ۚ وَلَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ ﴿٢٠٦﴾
जब उस उपद्रव करने वाले से - सदुपदेश के तौर पर - कहा जाता है : अल्लाह की सीमाओं का सम्मान करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डर, तो उसका गर्व और अहंकार उसे सच्चाई की ओर लौटने से रोक देता है और वह पाप में लीन रहता है। अतः उसका बदला जो उसके लिए पर्याप्त है, जहन्नम में प्रवेश है और निश्चय वह उसके वासियों के लिए बहुत बुरा ठिकाना और स्थान है।