तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ نَزَّلَ ٱلْكِتَـٰبَ بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ ٱخْتَلَفُوا۟ فِى ٱلْكِتَـٰبِ لَفِى شِقَاقٍۭ بَعِيدٍ ﴿١٧٦﴾
ज्ञान और मार्गदर्शन को छिपाने का यह दंड इस कारण है कि अल्लाह ने ईश्वरीय पुस्तकों को सत्य के साथ उतारा है और इसकी अपेक्षा यह है कि उन्हें स्पष्ट किया जाए, न कि छिपाया जाए। निःसंदेह जिन लोगों ने ईश्वरीय पुस्तकों में मतभेद किया, चुनाँचे उनमें से कुछ पर ईमान लाए और उनमें से कुछ को छिपाया, निश्चय वे सत्य से बहुत दूर और विरोध में हैं।