तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَالَ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوا۟ لَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَتَبَرَّأَ مِنْهُمْ كَمَا تَبَرَّءُوا۟ مِنَّا ۗ كَذَٰلِكَ يُرِيهِمُ ٱللَّهُ أَعْمَـٰلَهُمْ حَسَرَٰتٍ عَلَيْهِمْ ۖ وَمَا هُم بِخَـٰرِجِينَ مِنَ ٱلنَّارِ ﴿١٦٧﴾
तथा कमज़ोर और अनुयायी लोग कहेंगे : काश! हमें दुनिया में वापस जाने का एक अवसर मिल जाता, तो हम भी अपने पेशवाओं से उसी तरह बिल्कुल अलग हो जाते, जैसे वे आज हमसे बिल्कुल अलग हो गए। जिस तरह अल्लाह ने उन्हें आख़िरत में कठिन यातना दिखाई है, उन्हें उनके पेशवाओं का असत्य पर अनुसरण करने का परिणाम पछतावे और दुखों के रूप में दिखाएगा, और वे कभी भी आग (जहन्नम) से बाहर नहीं आएँगे।