तफ़सीर अल-मुख़्तसर
إِنَّ ٱلصَّفَا وَٱلْمَرْوَةَ مِن شَعَآئِرِ ٱللَّهِ ۖ فَمَنْ حَجَّ ٱلْبَيْتَ أَوِ ٱعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِ أَن يَطَّوَّفَ بِهِمَا ۚ وَمَن تَطَوَّعَ خَيْرًا فَإِنَّ ٱللَّهَ شَاكِرٌ عَلِيمٌ ﴿١٥٨﴾
काबा के पास सफ़ा और मरवा के नाम से जानी जाने वाली दो पहाड़ियाँ, शरीयत के दृश्य स्थलों में से हैं। इसलिए जो हज्ज अथवा उम्रा के लिए काबा पहुँचे; उसपर कोई पाप नहीं कि वह इन दोनों के बीच दौड़ लगाए। यहाँ पाप का इनकार करने में उन मुसलमानों के लिए आश्वासन है, जो इन दोनों के बीच दौड़ लगाने को जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामी युग) का काम समझकर गुनाह समझते थे। चुनाँचे अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि यह हज्ज के अनुष्ठानों में से है। जो भी व्यक्ति स्वेच्छा से निष्ठापूर्वक मुस्तहब आज्ञाकारिता का कार्य करे; अल्लाह उसकी क़द्र करने वाला है, उसे उससे स्वीकार करेगा और उसे उसपर बदला देगा। वह उसके बारे में जानने वाला है, जो अच्छा काम करता है और सवाब का हक़दार है।