तफ़सीर अल-मुख़्तसर
تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْـَٔلُونَ عَمَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿١٣٤﴾
यह तुमसे पहले गुज़रे हुए समुदायों में से एक समुदाय था, जो गुज़र चुका और उस कार्य की ओर जा चुका जो उसने आगे बढ़ाया था। अतः उसके लिए उसके कमाए हुए अच्छे या बुरे कर्म हैं, और तुम्हारे लिए तुम्हारे कमाए हुए कर्म। न तुमसे उनके कर्मों के बारे में पूछा जाएगा, न उनसे तुम्हारे कर्मों के बारे में पूछा जाएगा, तथा कोई भी किसी दूसरे के गुनाह के बदले नहीं पकड़ा जाएगा। बल्कि प्रत्येक को उसके कर्म का बदला दिया जाएगा। इसलिए अपने पहले गुज़रे हुए लोगों के कर्म के पीछे पड़ना तुम्हें खुद अपने कर्म को देखने से विचलित न करे। क्योंकि किसी को अल्लाह की दया के बाद, उसके सत्कर्म के सिवा कोई चीज़ हरगिज़ फायदा न देगी।