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البقرة

आयत 121

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

ٱلَّذِينَ ءَاتَيْنَـٰهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ يَتْلُونَهُۥ حَقَّ تِلَاوَتِهِۦٓ أُو۟لَـٰٓئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۗ وَمَن يَكْفُرْ بِهِۦ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ ﴿١٢١﴾

इस आयत में क़ुरआन अह्ले किताब के एक समूह के बारे में बात करता है, जो अपने हाथों में मौजूद अवतरित पुस्तकों पर अमल करते हैं और उनका पालन करते हैं जैसे उनका पालन किया जाना चाहिए। ये लोग इन पुस्तकों में नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सच्चे नबी होने को दर्शाने वाली निशानियाँ पाते हैं। यही कारण है कि उन्होंने आपपर ईमान लाने में जल्दी की। जबकि दूसरा समूह अपने कुफ़्र पर अड़ा रहा, तो उसे हानि उठानी पड़ी।