तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَلَمَّا جَآءَهُمْ رَسُولٌ مِّنْ عِندِ ٱللَّهِ مُصَدِّقٌ لِّمَا مَعَهُمْ نَبَذَ فَرِيقٌ مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ كِتَـٰبَ ٱللَّهِ وَرَآءَ ظُهُورِهِمْ كَأَنَّهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ﴿١٠١﴾
जब मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह की ओर से रसूल बनकर उनके पास आए, और आप उसके बिल्कुल अनुकूल थे, जो तौरात में आपकी विशेषता वर्णित है, तो उनके एक समूह ने तौरात से प्रमाणित होने वाली बात से मुँह मोड़ लिया और उसकी परवाह न करते हुए उसे अपनी पीठ के पीछे फेंक दिया। बिल्कुल उस अज्ञानी व्यक्ति की स्थिति के समान, जो उसमें मौजूद सत्य और मार्गदर्शन से लाभ नहीं उठाता, इसलिए उसकी परवाह नहीं करता है।