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البقرة

आयत 1

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓمٓ ﴿١﴾

{अलिफ़, लाम, मीम} ये उन अक्षरों में से हैं, जिनसे कुछ सूरतों (सूरत का बहुवचन) का आरंभ किया गया है। यह अरबी भाषा की वर्णमाला है जिसका अपने आप में कोई अर्थ नहीं है यदि वे इस तरह (अलिफ, बा, ता) अलग-अलग आएँ। लेकिन इनकी एक हिकमत और मतलब है; क्योंकि क़ुरआन में कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिसकी कोई ह़िकमत न हो। इनकी सबसे महत्वपूर्ण हिक़मतों में से एक : क़ुरआन के द्वारा चुनौती की ओर संकेत है, जो उन्हीं अक्षरों से बना है, जिन्हें वे जानते और बोलते हैं; यही कारण है कि अक्सर इन अक्षरों के बाद क़ुरआन पाक का उल्लेख होता है, जैसा कि इस सूरत में है।